मोटर व्हीकल एक्ट नए जुर्मानों से खड़े होते विवाद, जानिए किसके खाते में जाता है ट्रैफिक चालान का पैसा, केंद्र या राज्य?

Category : ऑटो/टेक | Sub Category : Auto Posted on 2019-09-14 12:40:28


मोटर व्हीकल एक्ट  नए जुर्मानों से खड़े होते विवाद, जानिए किसके खाते में जाता है ट्रैफिक चालान का पैसा, केंद्र या राज्य?

यातायात के नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि में कई गुना वृद्धि करने वाले मोटर व्हीकल अधिनियम ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है और कई राज्यों ने यह कहते हुए इसे लागू ना करने का निर्णय लिया है कि इससे जनता पर अनुचित भार पड़ेगा। मोटर व्हीकल (संशोधन) अधिनियम 2019 को संसद ने पिछले सत्र में पारित किया और यह एक सितंबर से प्रभावी हो गया। जुर्माने की राशि इतनी ज्यादा है कि इसी सप्ताह एक ट्रक चालक और उसके मालिक को ओवरलोडिंग और कुछ अन्य नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली में दो लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ा था।

इस अधिनियम का उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने से रोकना है : गडकरी
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि देश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की मौत हो जाती है, इसलिए इस अधिनियम का उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों का उल्लंघन करने से रोकना है। हालांकि गुजरात, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने नए कानून को लागू नहीं करने का फैसला किया, वहीं महाराष्ट्र ने केंद्र से जुर्माने की राशि पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया। नए कानून के अनुसार, गलत और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों को पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने से एक साल तक जेल या 1,000 से 5,000 रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जाएगी। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर दोषी को 10,000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा।

जानिए किन नियमों को तोड़ने पर कितना भरना पड़ रहा है जुर्माना
शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने जेल या 10,000 रुपए का जुर्माना या दोनों की सजा सुनाई जाएगी। वहीं दूसरी बार दोषी पाए जाने पर दो साल तक की जेल या 15,000 रुपए तक की जेल की सजा या दोनों सुनाई जाएगीं।
बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर 5,000 रुपए का जुर्माना कर दिया गया है जो पहले सिर्फ 500 रुपए था।
योग्य ना होने के बावजूद वाहन चलाने पर पहले सिर्फ 500 रुपए था, जो अब बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दिया गया है।
निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने पर जुर्माना 400 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है। हल्के मोटर वाहन के मामले में यह 2,000 रुपए है। इस मामले में मध्यम यात्री या माल ढोने वाले वाहनों पर जुर्माना 2,000 रुपए से 4,000 रुपए हो गया है।
बच्चे द्वारा वाहन चलाने पर वाहन का रजिस्ट्रेशन भी एक साल के लिए रद्द किया जा सकता है। एक साल पूरा होने पर आपको अपने वाहन के रजिस्ट्रेशन के लिए फिर से नया आवेदन करना होगा।
नए कानून के अनुसार, इस नियम का उल्लंघन करने पर 25,000 रुपए तक का जुर्माना और तीन साल तक की जेल हो सकती है। वहीं नाबालिग बच्चे के लिए उसे लर्नर लाइसेंस 25 साल तक नहीं मिलेगा।
इसी तरह कई अन्य नियमों के उल्लंघन पर भी जुर्माना कई गुना तक बढ़ा दिया गया है।


नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद ट्रैफिक नियम सख्‍त हो गए हैं.  ट्रैफिक के नए नियमों को तोड़ने वाले लोगों को अब पहले के मुकाबले भारी जुर्माना देना पड़ रहा है.

दिल्‍ली में कटा है अब तक का सबसे बड़ा चालान
पश्चिम बंगाल समेत कई राज्‍यों में लागू नहीं है नया ट्रैफिक नियम

बीते 1 सितंबर से देश के अधिकतर राज्‍यों में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू है. इसके लागू होने के बाद ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लोगों को भारी जुर्माना देना पड़ रहा है. हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में एक ट्रक का 2 लाख रुपये से अधिक की रकम का चालान कटा है. यह अब तक का सबसे महंगा चालान है. इस चालान को बाकायदा अदालत में जमा भी कराया गया. लेकिन सवाल है कि देश के अलग-अलग राज्‍यों में जो चालान काटे जा रहे हैं वो रकम किसके खाते में जा रहा है. आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब...   

किसके खाते में जाती है चालान की राशि?

किसी राज्‍य में ट्रैफिक पुलिस द्वारा काटे गए चालान से मिलने वाली रकम राज्य सरकार के खाते में जाती है. उदाहरण के लिए अगर आपके कार का चालान पटना में कटा है तो उससे मिलने वाली रकम बिहार सरकार के परिवहन मंत्रालय के खाते में जाएगी. वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में चालान की राशि केंद्र सरकार के खाते में जाती है.

हालांकि सिर्फ दिल्‍ली के मामले में चालान को लेकर नियम में मामूली बदलाव होता है. दरअसल, दिल्‍ली की ट्रैफिक पुलिस केंद्र सरकार के अधीन आती है जबकि स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी दिल्‍ली सरकार के लिए जिम्‍मेदार होती है. ट्रैफिक पुलिस और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी, दोनों को ही दिल्‍ली में चालान काटने का अधिकार है.

अगर कोर्ट में मामला पहुंच जाए तो...

कई बार ऐसा होता है कि चालान की राशि अदालत में जमा की जाती है तो ऐसी परिस्थिति में क्‍या होता है? यह सवाल जब हमने पटना हाईकोर्ट के सीनियर वकील धीरेंद्र कुमार से पूछा तो उन्‍होंने बताया, ' ऐसी स्थिति में भी चालान की राशि राज्‍य सरकार को ही जाती है. हालांकि दिल्‍ली समेत अन्‍य केंद्र शासित राज्‍यों में यह पैमाना बदल जाता है.' धीरेंद्र कुमार के मुताबिक अगर दिल्‍ली में ट्रैफिक पुलिस चालान काटती है तो वह राशि केंद्र सरकार के खाते में जाएगी. इसी तरह अगर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने चालान काटा है तो यह राशि दिल्‍ली सरकार के खाते में जाएगी क्‍योंकि राज्‍य का परिवहन विभाग दिल्‍ली सरकार के अधीन आता है.

 अगर नेशनल हाईवे पर चालान कट जाए तो...

अगर नेशनल हाईवे पर चालान कटता है तो ऐसी स्थिति में जुर्माने की राशि केंद्र और राज्‍य सरकार के बीच बंट जाती है. वहीं स्‍टेट हाईवे पर कटने वाले चालान की राशि राज्‍य सरकार के खाते में जाती है. वहीं दिल्‍ली के मामले में एक बार फिर यह देखा जाता है कि चालान काटने वाली ट्रैफिक पुलिस है या स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी. दिल्‍ली के ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम को लेकर राज्‍य सरकार को सुझाव देने वाले वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट (WRI) के डायरेक्टर माधव पाई ने बताया कि कई बार चालान राशि को सेफ्टी फंड बनाकर कलेक्‍ट किया जाता है.  

अब तक के 3 बड़े चालान

- बीते 12 सितंबर को सबसे बड़ा चालान दिल्‍ली में एक ट्रक का कटा है. इस ट्रक के चालान की जुर्माना राशि थी 2,00, 500 रुपये है. यह चालान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मुकरबा चौक पर काटा था. ओवरलोडिंग में काटे गए इस चालान की जुर्माना राशि ट्रक मालिक द्वारा अदालत में भरी गई.

- बीते 5 सितंबर को दिल्ली में ही राजस्थान नंबर के एक ट्रक पर  1,41,700 रुपये का जुर्माना लगा था. इसका जुर्माना राशि चार दिन बाद 9 सितंबर को रोहिणी की ट्रैफिक कोर्ट में जमा कराई गई थी. यह चालान भी ओवरलोडिंग को लेकर ही किया गया था।

-  बीते 3 सितंबर को ओडिशा में एक ट्रक ड्राइवर पर 86,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया. संभलपुर रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) ने यह जुर्माना लगाया. हालांकि 6 सितंबर को 70 हजार रुपये के सेटेलमेंट रकम भरने के बाद ट्रक ड्राइवर को ट्रक ले जाने दिया गया.

हर राज्‍य में एक जैसी स्थिति नहीं


ट्रैफिक के नए नियम और चालान की राशि हर राज्‍य में एक जैसी हो, ये जरूरी नहीं है. अगर राज्‍य चाहें तो इस नियमों या चालान की राशि में राहत दे सकते हैं. इसी के तहत गुजरात और उत्‍तराखंड जैसे राज्‍यों ने लोगों को राहत दी है. वहीं राज्‍यों के पास इस नए नियम को खारिज करने का भी अधिकार है. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल, महाराष्‍ट्र समेत कई बड़े राज्‍यों में ट्रैफिक के नए नियम नहीं लागू हैं.


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