Category : मनी टिप्स | Sub Category : पैसे चाहिए Posted on 2019-09-02 09:59:15
खेती में भविष्य बनाना चाहते हैं तो औषिधीय पौधों (मेडिसिनल प्लांट) अच्छा विकल्प हो सकते हैं। आयुर्वेद के अलावा अब एलोपैथ में भी कुछ दवाओं का निर्माण हर्ब्स से निकले केमिकल को यूज करके हो रहा है। यही कारण है कि इनकी मांग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। आज हम आपको एक ऐसे औषिधीय पौधे की खेती के बारे में बता रहें हैं जिसकी न सिर्फ डिमांड अच्छी है बल्कि अन्य की तुलना में कीमत भी बहुत अधिक है। इस पौधे का नाम है सतावर। जी हां, सतावर का उपयोग विभिन्न दवाएं बनाने में होता है। किसानों के अनुभव व मार्केट विशेषज्ञों के आधार पर अगर इनकम की बात करें तो सतावर की खेती से इनकम भी अच्छी खासी है। दो साल की इस फसल में आप महज 50 हजार रुपए लगाकर एक एकड़ फसल से ही 6 लाख रुपए तक इनकम कर सकते हैं। यानी, साल का 3 लाख रुपए। आइए जानते हैं सतावर की खेती, कीमत, उपयोग व बाजार के बारे में....
जानिए कितने दिनों की है खेती....
18 महीने में तैयार होती है फसल
सतावर ए ग्रेड औषिधीय पौधा है। इसकी फसल 18 महीने में तैयार होती है। सतावर की जड़ से दवाएं तैयार होती हैं। इससे 18 महीने बाद गिली जड़ प्राप्त होती हैं। इसके बाद जब इनको सुखाया जाता है तो इसमें वजन लगभग एक तिहाही रह जाता है। सलसन अगर आप 10 क्विंटल जड़ प्राप्त करते हैं तो सुखाने के बाद यह केवल 3 क्विंटल ही रह जाती हैं। फसल का दाम जड़ों की गुणवत्ता पर ही निर्भर करता है।
जानिए कितना आता है खर्च
20 से 50 हजार रुपए
बरेली निवासी धर्मेंद्र सहाय जो कि सतावर को बड़े पैमाने पर करते हैं ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में एक एकड़ में सतावर की फसल लगाई थी। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग ली और फिर लखनऊ से लगभग 15 हजार रुपए का बीज खरीदा था। इसके बाद इसकी नर्सरी तैयार की और फिर उसको बताई विधि के अनुसार रोपाई की थी। धर्मेंद्र के अनुसार उन्होंने अपनी फसल को 2.2 साल में बेचा था। दिल्ली में बेची गईं कुल जड़ों की कीमत उन्हें लगभग 6.3 लाख रुपए मिली। धर्मेद्र ने बताया कि अब वो 12 एकड़ में सतावर की खेती कर रहे हैं। एक एकड़ में मजदूरी व अन्य खर्च मिलाकर कुल 50 हजार रुपए का खर्च आया था।
जानिए कितनी होती है पैदावार....
मिलती हैं 40 से 50 क्विंटल सूखी जड़
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स(सीमैप) के वैज्ञानिक डॉ. संजय यादव ने बताया कि उन्होंने सतावर की कई वैज्ञायटीज डवलेप की हैं। जिन क्षेत्रों में तापमान शून्य से नीचे नहीं जाता वहां पर सतावर की खेती की जा सकती है। प्रति एकड़ के खेत में 200 से 250 क्विंटल गीली जड़ मिलती है जो सूखने के बाद 40 से 50 क्विंटल प्राप्त होती है। सतावर को अगर प्लास्टिकल्चर विधि से लगाया जाए तो फसल को नुकसान कम होता है और पैदावार अच्छी ली जा सकती है।
जानिए कितनी होती है इनकम....
एक बार में कर सकते हैं 6 लाख तक की इनकम
सतावर को हरिद्वार, कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, बनारस आदि बाजारों में बेचा जा सकता है। इसके अलावा विभिन्न आयुर्वेदिक दवा कंपनियों डाबर, पतंजलि, हिमानी, वैद्यनाथ आदि भी इसकी फसल को डायरेक्ट किसानों या फिर मंडियों से खरीदती हैं। किसान धर्मेंद्र सहाय के अनुसार वर्तमान में सतावर के भाव 250 से 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक चल रहे हैं। यानी 25 हजार से 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल। ऐसे में अगर आप बेहतर क्वालिटी की 30 क्विंटल जड़ें भी बेच पाते हैं तो आपको 7 से 9 लाख रुपए आसानी से मिल जाएंगे। यदि भाव और पैदावार कम मानी जाए तब भी 6 लाख रुपए तक आसानी से कमाए जा सकते हैं।
कमाई करो कोट