भूल जाइए AK-47, भारत में बनेगी AK-203, आतंकियों के छुड़ाएगी पसीने

Category : बड़ी खबर | Sub Category : नेशनल Posted on 2019-03-03 04:00:09


भूल जाइए AK-47, भारत में बनेगी AK-203, आतंकियों के छुड़ाएगी पसीने


नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई वाली केंद्र सरकार रविवार को ऐसा काम किया, जिससे निश्चित रूप से आतंकवादियों में खौफ खासा बढ़ गया होगा। दरअसल पीएम मोदी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के गढ़ अमेठी में कलाश्निकोव राइफल (Kalashnikov rifle ) बनाने वाली यूनिट का शुभारम्भ किया।


AK-203 की ये हैं खासियत

AK-47 भले ही भारत में कलाश्निकोव रायफल का पर्याय हो, लेकिन भारत में AK-203 वर्जन का प्रोडक्शन होगा। AK-47 कलाश्निकोव रायफल का बेसिक मॉडल है, जबकि AK-203 सबसे एडवांस मॉडल है। AK-47 से हल्की, छोटी और ज्यादा घातक होने के चलते AK-203 को ज्यादा बेहतर माना जाता है। इसकी रूस के बाजार में भी खासी डिमांड है।

माना जा रहा है कि अपने आकार और वजन के चलते यह आतंकियों से निपटने में भी अहम रोल अदा कर सकती है। यह मौजूदा दौर की बेहतरीन राइफलों में से एक है। यह फुलसाइज राइफल है, जिसमें 415 एमएम लंबी बैरल है और इसकी कुल लंबाई 880 एमएम है। इस सीरीज की फुल साइज राइफल्स के साथ ग्रेनेड लॉन्चर और बेनेट्स को जोड़ना भी संभव है। 


रूस के साथ बनाया ज्वाइंट वेंचर

भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड भारत के आयुध कारखाने और एक रूसी कंपनी के बीच ज्वाइंट वेंचर है। यह कोरवा आयुध कारखाने में कलाश्निकोव राइफलों की अंतिम श्रृंखला का उत्पादन करेगा।


आतंकियों के चलते देश में फेमस हुई थी AK-47 

भारत में AK-47 को 1990 के दौर में उस समय खासी प्रसिद्धि मिली जब पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकियों ने भारतीय सेना के खिलाफ कश्मीर में इसका इस्ते माल किया। इसके चलते सेना को भी अपने हथियारों को अपग्रेड करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाद में इसका यूज भी किया गया। 5.56 mm कैलिबर के चलते यह आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में बेहद मददगार रही और इससे सैनिकों की मौत में भी कमी आई। हालांकि AK-203 को AK-47 से भी घातक माना जाता है। 


100 से ज्यादा देशों की आर्मी करती है यूज 

AK-47 या काला‍श्निकोव रायफल 106 देशों की सेना की ओर से इस्तेमाल की जाती है। इस रायफल का ब्लूप्रिंट किसी प्रयोगशाला और कई वैज्ञानिकों के बीच तैयार नहीं हुआ था, जबकि अस्पताल के बैड पर पड़े बीमार मिखाइल कलाश्निकोव के दिमाग में तैयार हुआ था। कुछ साल पहले ही उनका देहांत हुआ है। 


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