Fixed Deposit: FD तुड़वाने से बेहतर लोन लेना, जानिए ऐसी ही 8 बातें

Category : मनी टिप्स | Sub Category : सेविंग Posted on 2019-06-28 04:53:20


Fixed Deposit:  FD तुड़वाने से बेहतर लोन लेना, जानिए ऐसी ही 8 बातें

नई दिल्‍ली. फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) यानी एफडी (FD) को भारत में निवेश का अच्छा ऑप्शन माना जाता है। कई बार पैसे की जरूरत पड़ने पर इसे तुड़वाना भी पड़ जाता है, हालांकि ऐसा नुकसानदेह रहता है। आपको जानकर हैरत होगी की बैंक एफडी पर लोन भी देते हैं, जो तुड़वाने की जगह पैसे की व्यवस्था करने का एक अच्छा ऑप्शन है। इसलिए बेहतर रहेगा कि FD खुलवाने से पहले सभी जानकारियों और टर्म्‍स एंड कंडीशंस के बारे में पता कर लिया जाए। हम आपको 8 ऐसी ही बातों के बारे में बता रहे हैं...

 

1. एफडी पर मिलता है लोन भी

अगर आपको पैसों की जरूरत आन पड़ी है और आप एफडी तुड़वाने की सोच रहे हैं तो ठहर जाएं। कई बैंकों में एफडी के ऊपर लोन लेने की भी सुविधा है। उदाहरण के लिए एसबीआई आपको एफडी पर एफडी अमाउंट के 90 फीसदी तक का लोन उपलब्‍ध कराता है। यह 25,000 रुपए से 5 करोड़ रुपए तक है।

 

2. एक दिन की देरी पड़ती है भारी

कई लोग FD राउंड फिगर कहलाने वाली अवधि जैसे 6 माह, 1 साल, 2 साल आदि के हिसाब से कराते हैं। कुछ बैंकों में इस अवधि में 1 या उससे ज्‍यादा दिन या कम दिनों, के लिए एफडी पर ब्‍याज दर अलग-अलग होती है। इसलिए एफडी खुलवाने से पहले एफडी अवधि और उस पर ब्‍याज का पता जरूर कर लें। हो सकता है कि राउंड फिगर अवधि के बजाय थोड़े दिन कम या ज्‍यादा पर आपको कुछ एक्‍स्‍ट्रा ब्‍याज मिल जाए।

 

3. अवधि पूरी होने तक मिलेगा वही ब्‍याज

भले ही आरबीआई (RBI) ब्‍याज दरों में बदलाव करे, लेकिन आपको एफडी की अवधि पूरी होने तक वही ब्‍याज मिलेगा, जो एफडी खुलवाते वक्‍त था। एफडी के लिए ब्‍याज दर में बदलाव नई खोले जाने वाली एफडी या फिर टेन्‍योर पूरा होने के बाद एफडी रिन्‍युअल पर ही लागू होता है। इसलिए मौजूदा एफडी धारक को इससे किसी भी तरह का फायदा या नुकसान नहीं होता।

 

4. एफडी तुड़वाने पर देना होता है चार्ज

कई बैंक मैच्‍योरिटी पीरियड से पहले निकाल ली जाने वाली एफडी की भी सुविधा देते हैं। यानी आप इन्‍हें जरूरत के वक्‍त तुड़वा सकते हैं लेकिन ऐसा करने पर बैंक आपसे प्री-मैच्‍योरिटी चार्ज भी वसूलते हैं।

 

5. ले सकते हैं मंथली, क्‍वार्टरली या सालाना ब्‍याज

अब आपको ब्‍याज पाने के लिए साल खत्‍म होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। बैंक अब मंथली, क्‍वार्टरली और सालाना ब्‍याज पाने की सुविधा देते हैं। यानी यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसमें से कौन सा विकल्‍प चुनते हैं।

 

 6. नॉमिनेशन

अगर आप एफडी खुलवा रहे हैं तो बेहतर होगा कि सेविंग्‍स अकाउंट या अन्‍य स्‍कीमों की तरह इसमें भी किसी व्यक्ति को नॉमिनी भी बनाएं, ताकि अगर आपको कुछ हो भी जाता है तो आपका इन्‍वेस्‍ट किया हुआ पैसा निकालना आसान हो जाएगा।

 

7. ब्‍याज पर TDS

अगर एफडी से एक साल में ब्याज की रकम 10 हजार रुपए से ज्यादा है तो बैंक 10 फीसदी टैक्‍स (टीडीएस) काटते हैं। इसे साल के अंत में काटा जाता है। अगर आपने किसी बैंक में 1 से ज्‍यादा एफडी खुलवा रखी हैं तो ब्‍याज की गणना दोनों एफडी के ब्‍याज को मिलाकर होगी। हालांकि आप इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करके काटे गए टैक्‍स क्‍लेम कर सकते हैं। बैंक आपका टीडीएस न काटें, इसके लिए आप फॉर्म 15G /15H भरकर जमा कर सकते हैं। यह सेल्‍फ डिक्‍लेरेशन फॉर्म होता है, जिसमें आपके टैक्‍सेबल लिमिट में न आने का डिक्‍लेरेशन होता है। इसके अलावा कुछ बैंक टैक्‍स सेविंग एफडी, स्‍पेशल एफडी की भी सुविधा देते हैं।

 

8. एक की बजाय छोटी-छोटी ज्‍यादा FD हैं बेहतर

बैंक में डिपॉजिट पर भी आपको 1 लाख रुपए तक का प्रोटेक्‍शन कवर मिलता है। इसे आरबीआई की सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) बैंक के डूबने की सूरत में देती है और यह नियम बैंकों की हर ब्रांच के लिए लागू है। इसलिए अच्‍छा होगा अगर आप बड़ी रकम को एक एफडी में न रखकर अलग-अलग बैंकों में इन्वेस्ट करें। इसके फायदे ये हैं कि अगर इमरजेंसी में रकम की जरूरत है तो जरूरत के मुताबिक रकम की एफडी तोड़कर काम चला सकते हैं। दूसरा फायदा यह भी है कि अगर एक जगह कम ब्‍याज है तो दूसरी जगह ज्‍यादा ब्‍याज ले सकते हैं।

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