BJP की सुनामी में बिखर गया वंशबाद, ये उत्तराधिकारी नहीं बचा पाए अपनी साख

Category : बड़ी खबर | Sub Category : नेशनल Posted on 2019-05-24 05:42:12


BJP की सुनामी में बिखर गया वंशबाद, ये उत्तराधिकारी नहीं बचा पाए अपनी साख

लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार अभियान के दौरान पीएम मोदी ने हर मंच से वंशवादी राजनीति पर प्रहार किया था। नतीजे बता रहे हैं कि वह देश को यह समझाने में सफल रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी की कमान संभालने के साथ ही देश में अरसे से चली आ रही वंशवाद की राजनीति पर सीधा हमला करना शुरू कर दिया था। लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार अभियान के दौरान पीएम मोदी ने हर मंच से वंशवादी राजनीति पर प्रहार किया था। नतीजे बता रहे हैं कि वह देश को यह समझाने में सफल रहे कि पीढ़ी दर पीढ़ी सत्‍ता पर काबिज रहने वाले लोग लोकतंत्र के लिए घायत हैं। इस बार बीजेपी की सुनामी में बड़े-बड़े दिग्‍गजों के उत्‍तराधिकारी ताज तो क्‍या अपनी साख भी नहीं बचा पाए।

लोकसभा चुनाव 2019 के तहत राजस्‍थान की सभी 25 सीटों पर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है। इस मोदी लहर में राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे और जोधपुर से कांग्रेस के प्रत्‍याशी वैभव गहलोत भी अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं। उन्‍हें बीजेपी के प्रत्‍याशी गजेंद्र सिंह शेखावत ने 18,827 वोटों से मात दी है।

1980 में यहां से संजय गांधी सांसद चुने गए थे। संजय गांधी के निधन के बाद यहां से 1981 में राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी ने चुनाव लड़ा था। राजीव गांधी अमेठी सीट से 1991 तक सांसद रहे हैं। राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेस के सतीश शर्मा यहां से 1991 से 1998 तक सांसद रहे। 1999 में यहां से सोनिया गांधी सांसद रहीं। उसके बाद राहुल गांधी यहां से सांसद थे।

जम्‍मू कश्‍मीर में पीडीपी प्रमुख और राज्‍य की पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपना गढ़ अनंतनाग की सीट भी नहीं बचा सकीं। यहां पर नेशनल कांफ्रेंस उम्मीदवार और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हसनैन मसूदी ने मुफ्ती को मात दी है। मुफ्ती को केवल 30 हजार 500 वोट मिले हैं। अनंतनाग संसदीय क्षेत्र से महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्‍मद सईद भी सांसद रह चुके हैं।

धौरहा संसदीय सीट पर बीजेपी प्रत्‍याशी रेखा वर्मा ने जीत हासिल की है। जबकि दूसरे नंबर पर गठबंधन के प्रत्‍याशी और तीसरे नंबर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद रहे। जितिन प्रसाद के पिता का देश की सियासत में काफी महत्‍व था। वे इंदिरा गांधी से लेकर पीवी नरसिम्‍हा राव के समय में काफी चर्चित चेहरा हुआ करते थे। वे संगठन में भी कई अहम भूमिका निभा चुके हैं।

दक्षिण मुंबई सीट से शिवसेना के अरविंद गनपत सावंत ने मुंबई कांग्रेस अध्‍यक्ष मिलिंद देवड़ा को मात दे दी है। देवड़ा को पार्टी की कमान देकर उम्‍मीद जताई गई थी कि वे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। लेकिन, मिलिंद देवड़ा अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। मिलिंद देवड़ा के पिता मुरली देवड़ा भी चार बार सांसद रह चुके हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से हार गए हैं। मुजफ्फरनगर सीट का इतिहास रहा है कि यहां से कोई गैर भाजपाई जाट चुनाव नहीं जीत पाया है। इस सीट से खुद चौधरी चरण सिंह भी हार चुके हैं।

रालोद के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष जयंत चौधरी को केंद्रीय मंत्री सत्‍यपाल सिंह ने हरा दिया है। सत्‍यपाल सिंह ने जयंत को 23502 वोटों से मात दी है। बागपत से जयंत के पिता अजीत सिंह और दादा चरण सिंह सांसद रहे हैं। इसे चौधरी परिवार की मजबूत सीट माना जाता है।

मोदी लहर में राकांपा प्रमुख शरद पवार के पौत्र पार्थ पवार महाराष्ट्र की मावल लोकसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। पार्थ पवार राज्‍य के पूर्व उप मुख्‍यमंत्री अजित पवार के बेटे हैं।

हरियाणा के रोहतक में बीजेपी के उम्मीदवार अरविंद शर्मा और कांग्रेस उम्मीदवार दीपेंद्र हुड्डा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। 15 हजार पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे 2600 वोटों से बीजेपी के अरविंद शर्मा को विजयी घोषित किया गया। दीपेंद्र हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे हैं।

दिग्‍गज कांग्रेसी नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी हार गए हैं। सोनीपत की सीट पर बीजेपी के प्रत्‍याशी रमेशचंद्र कौशिक ने उन्‍हें मात दी है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा मार्च 2005 से अक्टूबर 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। अक्टूबर 2009 में कांग्रेस के दोबारा जीतने पर उन्होनें दूसरी पारी की शुरुआत की जो कि हरियाणा के इतिहास में 1972 के बाद पहली बार था। 2014 के हरियाणा विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद 19 अक्टूबर 2014 को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया।

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से अलग होकर जननायक जनता पार्टी बनाने वाले दुष्‍यंत चौटाला को भी हार का सामना करना पड़ा है। उन्‍हें केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह ने पराजित किया है। उनके पिता अजय चौटाला भी सांसद एवं विधायक रह चुके हैं जबकि दादा ओम प्रकाश चौटाला हरियाणा के मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं।

बगावती तेवर अपनाकर समाजवादी पार्टी से अलग हुए शिवपाल यादव को इस बार हार का मुंह देखना पड़ा। शिवपाल रनरअप भी नहीं रह पाए। इस सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की और सपा अक्षय यादव दूसरे स्‍थान पर रहे। जबकि शिवपाल तीसरे नंबर पर रहे।

शिबू सोरेन की बेटी अंजली सोरेन ओडिशा के मयूरभंज सीट से लोकसभा चुनाव हार गई हैं। इस सीट पर बीजेपी के विश्‍वेश्‍वर तुडु ने जीत दर्ज की है।

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