Category : मनी टिप्स | Sub Category : पीएफ Posted on 2019-05-08 15:26:08
EPFO Family Pension: संगठित
क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए
श्रम मंत्रालय के अधीन कार्यरत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) उनके
पीएफ और पेंशन की स्कीम संचालित करता है। इसके तहत, प्रत्येक
कर्मचारी को प्रत्येक माह अपने वेतन का एक तय हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में
कंट्रीब्यूट करना होता है। नियोक्ता भी उतना कंट्रीब्यूशन कर्मचारी के अकाउंट में
करता है। कंपनी के PF कॉन्ट्रीब्यूशन में से एक हिस्सा इंप्लॉई की
पेंशन यानी इम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है। इस
पेंशन का लाभ इंप्लॉई को रिटायरमेंट के बाद मिलता है।
ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, इम्प्लॉई
पेंशन स्कीम (EPS) की एक खासियत यह है कि इसका लाभ सिर्फ कर्मचारी
को ही नही मिलता, बल्कि अगर किसी कारणवश EPF मेंबर
की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार यानी पत्नी या पति और बच्चों को भी पेंशन का
लाभ मिलता है। इसे ‘फैमिली पेंशन’ कहते हैं।
इंप्लॉई को कब
मिलती है पेंशन?
EPS का लाभ लेने के
लिए इंप्लॉई का मिनिमम 10 साल लगातार नौकरी करना जरूरी है। इस
पेंशन स्कीम में केवल कंपनी योगदान देती है। यह PF में कंपनी
द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान का 8.33
फीसदी होता है। साथ ही सरकार भी इसमें योगदान देती है, जो
बेसिक सैलरी के 1.16 फीसदी से ज्यादा नहीं होता। ईपीएफ मेंबर
रिटायरमेंट के अलावा पूरी तरह से डिसेबल हो जाने पर भी इस पेंशन को लेने का हकदार
होता है।
फैमिली पेंशन के
लिए सर्विस की नहीं है लिमिट
EPF ने फैमिली पेंशन
के लिए न्यूनतम 10 साल की सर्विस अनिवार्यता नहीं रखी है। यानी 10 साल पूरा होने
से पहले भी अगर इंप्लॉई की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को पेंशन का लाभ मिलेगा।
लेकिन इंप्लॉई को पेंशन तभी मिलती है, जब उसने कम से
कम 10 साल की नौकरी की हो।
किसे मिलेगी
फैमिली पेंशन?
स्कीम के मेंबर इंप्लॉई के मृत्यु के
बाद उसकी पत्नी या पति को पेंशन मिलती है।
अगर इंप्लॉई के बच्चे हैं तो उसके 2
बच्चों को भी 25 साल की उम्र तक पेंशन मिलती है। इसमें सगे, कानूनी
रूप से गोद लिए बच्चे शामिल हैं।
अगर इंप्लॉई शादीशुदा नहीं है तो उसके द्वारा PF व
पेंशन के लिए बनाए गए नॉमिनी को जिंदगीभर पेंशन मिलती है।
अगर किसी की हैं
2 पत्नी
अगर किसी इंप्लॉई की दो पत्नियां हैं तो मृत्यु के बाद पेंशन की हकदार उसकी पहली पत्नी होगी। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद उसकी दूसरी पत्नी को यह पेंशन मिलेगी।
पत्नी या पति कर ले दूसरी शादी
अगर मृत इंप्लॉई की पत्नी या पति की भी
मौत हो जाए या फिर वह दूसरी शादी कर ले तो उसके बच्चों को पेंशन का लाभ मिलता
रहता है। मृत इंप्लॉई के किसी भी तरह की परमानेंट डिसएबिलिटी से ग्रस्त बच्चे को
पेंशन का लाभ पूरी जिंदगी दिया जाता है।
अगर नहीं बनाया
कोई नॉमिनी
अगर मेंबर इंप्लॉई शादीशुदा नहीं है और
न ही उसने किसी को PF और पेंशन में नॉमिनी बनाया है तो ऐसे में पेंशन
के हकदार मृत इंप्लॉई पर निर्भर उसके मां या पिता होंगे। अगर पिता की मौत हो जाती
है तो उसके बाद पेंशन मृत इंप्लॉई की मां को उनकी मृत्यु तक मिलती है।
कमाई करो कोट